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छठ पूजा की पौराणिक कथाएँ और उनका महत्व

Wednesday, 27 May 2026 Santosh Chouhan


 छठ पूजा का त्योहार कई पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है जो इसके धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को और बढ़ाती हैं। इनमें से कुछ प्रमुख कथाएं निम्नलिखित हैं:


द्रौपदी और पांडवों की कथा

महाभारत काल में, जब पांडव जुए में अपना सब कुछ हार गए थे और उन्हें वनवास जाना पड़ा था, तब द्रौपदी ने सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की थी। ऐसा माना जाता है कि इस पूजा के प्रभाव से पांडवों को अपना खोया हुआ राज्य वापस मिला और उनके जीवन में समृद्धि लौट आई। द्रौपदी ने यह व्रत पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ किया था, और इसी से इस पर्व की शुरुआत मानी जाती है।


सूर्य पुत्र कर्ण की कथा

एक अन्य कथा के अनुसार, सूर्य देव के पुत्र दानवीर कर्ण ने सबसे पहले छठ पूजा की थी। कर्ण महान धनुर्धर और दानवीर थे। वह प्रतिदिन सुबह नदी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। माना जाता है कि इसी अनुष्ठान से उन्हें अतुलनीय शक्ति और यश प्राप्त हुआ। छठ पूजा में सूर्य देव की उपासना की यह परंपरा कर्ण से ही चली आ रही है।


राम और सीता की कथा

कुछ लोककथाओं के अनुसार, भगवान राम और माता सीता ने लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने पर रामराज्य की स्थापना के लिए सूर्य देव की आराधना की थी। उन्होंने कार्तिक शुक्ल षष्ठी को व्रत रखकर सूर्य देव की पूजा की थी। यह कथा भी छठ पूजा के प्राचीनत्व और महत्व को बताती है।

इन कथाओं के माध्यम से छठ पूजा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति सम्मान, शुद्धि, और आत्मविश्वास का भी प्रतीक है। भक्त इन कथाओं में निहित मूल्यों से प्रेरणा लेकर इस पर्व को पूरी श्रद्धा से मनाते हैं।

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