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ओजागांव (भुरागांव) श्री श्री छठ पूजा समिति: आस्था, संस्कृति और ६० वर्षों से अधिक का अटूट विश्वास

Wednesday, 27 May 2026 Santosh Chouhan

 


द्वारा: समिति वेब टीम | दिनांक: मई 2026

छठ महापर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि लोक आस्था, शुचिता, अनुशासन और प्रकृति के प्रति अगाध कृतज्ञता का जीवंत प्रतीक है। जब सूर्य देव की सुनहरी किरणें ब्रह्मपुत्र के पवित्र तट को छूती हैं, तो पूरा ओजागांव और भुरागांव क्षेत्र छठी मैया के जयकारों से गुंजायमान हो उठता है।

हमारा सौभाग्य है कि  ओजागांव (भुरागांव) श्री श्री छठ पूजा समिति वर्ष 1966 से लगातार इस पावन पर्व को पूरी निष्ठा, भव्यता और सेवा भाव के साथ आयोजित करती आ रही है।

         आस्था का ऐतिहासिक सफर: स्थापना से आज तक

वर्ष 1966 में एक छोटे से संकल्प के साथ शुरू हुई यह यात्रा आज छह दशकों (60+ Years) के सुनहरे पड़ाव को पार कर चुकी है। असम के मोरीगांव जिले के भुरागांव क्षेत्र में स्थित हमारी समिति का मुख्य उद्देश्य हमेशा से यही रहा है कि दूर-दूर से आने वाले व्रतियों (परवैतिन) और श्रद्धालुओं को एक अत्यंत स्वच्छ, सुरक्षित और भक्तिमय माहौल प्रदान किया जा सके।

शुरुआती दौर में संसाधन सीमित थे, लेकिन स्थानीय लोगों के सहयोग, युवाओं के जोश और बुजुर्गों के मार्गदर्शन ने इस आयोजन को आज इस भव्य मुकाम पर पहुंचाया है।

          ब्रह्मपुत्र फेरी घाट: आस्था का महापड़ाव

हमारी पूजा का मुख्य केंद्र  ब्रह्मपुत्र फेरी घाट (भुरागांव) है। अस्ताचलगामी (डूबते) और उदीयमान (उगते) सूर्य को अर्घ्य देने के लिए इस घाट की महत्ता देखते ही बनती है। समिति द्वारा घाट पर हर वर्ष विशेष तैयारियां की जाती हैं:

घाट का सुंदरीकरण और सुरक्षा: ब्रह्मपुत्र की लहरों के बीच व्रतियों की सुरक्षा के लिए मजबूत बैरिकेडिंग और लाइटिंग की व्यवस्था की जाती है।

व्रतियों के लिए सुविधाएं: चेंजिंग रूम, विश्राम गृह, और घाट तक पहुंचने के लिए साफ-सुथरे रास्तों का निर्माण।

सांस्कृतिक संध्या: खरना के दिन से लेकर सुबह के अर्घ्य तक भक्तिमय भजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन, जो माहौल को पूरी तरह दिव्य बना देता है।

अनेकता में एकता' का जीवंत उदाहरण

हमारी समिति और भुरागांव का यह छठ मेला केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं है। इसमें स्थानीय प्रशासन, हर वर्ग के युवाओं और अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों का जो सहयोग मिलता है, वह 'अनेकता में एकता' की सबसे खूबसूरत मिसाल है। सूर्य देव, जो पूरी सृष्टि को बिना किसी भेदभाव के प्रकाश देते हैं, उन्हीं की कृपा है कि इस पावन तट पर हर कोई एक रंग में रंगा नजर आता है।

         समिति की अपील: स्वच्छता ही सेवा

छठ महापर्व का सबसे बड़ा संदेश है—स्वच्छता। हमारी समिति इस ब्लॉग के माध्यम से सभी श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों से अपील करती है:

 1. प्लास्टिक मुक्त घाट: कृपया घाट परिसर में किसी भी प्रकार की प्लास्टिक या सिंगल-यूज सामग्री का उपयोग न करें।

 2. पूजा सामग्री का सही विसर्जन: पूजा के बाद बचे हुए दीये, सूप या अन्य सामग्रियों को घाट पर इधर-उधर फेंकने के बजाय निर्धारित कूड़ेदान या विसर्जन स्थलों पर ही डालें।

 3. स्वयंसेवकों का सहयोग करें: घाट पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए समिति के स्वयंसेवकों और सुरक्षाकर्मियों के निर्देशों का पालन करें।

 सहयोग के लिए आभार

ओजागांव (भुरागांव) श्री श्री छठ पूजा समिति उन सभी दानदाताओं, स्वयंसेवकों, माताओं-बहनों और भाइयों के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करती है, जिनके बिना यह महापर्व अधूरा है।

आइए, इस वर्ष भी हम सब मिलकर छठी मैया और सूर्य देव की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए पूरी पवित्रता के साथ आगे बढ़ें।

बोलीं 'छठी मैया की जय!' 'भस्कराए नमः!

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